उत्तराखंड में आयुष्मान बना संजीवनी- 17 लाख से अधिक मरीजों को मिला निःशुल्क इलाज – Jan Jan Tak
  • Mon. May 4th, 2026

Jan Jan Tak

Jan Jan Tak

उत्तराखंड में आयुष्मान बना संजीवनी- 17 लाख से अधिक मरीजों को मिला निःशुल्क इलाज

ByJan Jan Tak

Jan 22, 2026
उत्तराखंड में आयुष्मान बना संजीवनी- 17 लाख से अधिक मरीजों को मिला निःशुल्क इलाज

आयुष्मान योजना से ₹3400 करोड़ का मुफ्त उपचार, लाखों परिवारों को मिली राहत

देहरादून। उत्तराखंड में अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए वास्तविक संजीवनी साबित हो रही है। राज्य में अब तक 17 लाख से अधिक मरीजों को इस योजना के तहत निःशुल्क इलाज मिल चुका है, जबकि जरूरतमंदों के उपचार पर ₹3400 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है।
राज्य सरकार ने 25 दिसंबर 2018 को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अनुरूप अटल आयुष्मान योजना लागू की थी। इसके तहत प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष ₹5 लाख तक का निःशुल्क स्वास्थ्य सुरक्षा कवर दिया जा रहा है। अब तक करीब 61 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं।

योजना का सबसे बड़ा लाभ गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को मिल रहा है, जिन्हें महंगे इलाज के कारण अक्सर उपचार से वंचित रहना पड़ता था। अब वे बिना आर्थिक चिंता के इलाज करा पा रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि जिन परिवारों में 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग हैं, उन्हें परिवार के ₹5 लाख के कवर के अतिरिक्त बुजुर्गों के लिए अलग से ₹5 लाख तक की निःशुल्क उपचार सुविधा दी जा रही है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी सोच का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में 279 सरकारी और 222 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से सूचीबद्ध हैं, जबकि देशभर में 31 हजार से अधिक अस्पताल इस योजना से जुड़े हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि किसी अस्पताल द्वारा आयुष्मान इलाज के दौरान मरीज से भुगतान की मांग की जाती है तो इसकी शिकायत प्राधिकरण में की जा सकती है।

महंगे इलाज भी निःशुल्क, लाखों मरीजों को मिला जीवनदान

अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना ने राज्य में महंगे और जटिल इलाज को आमजन की पहुंच में ला दिया है। योजना के तहत अब तक लाखों मरीजों को बिना किसी आर्थिक बोझ के उपचार मिला है। खासकर डायलिसिस, हृदय रोग, कैंसर, न्यूरोसर्जरी, नेत्र रोग और जोड़ों के प्रत्यारोपण जैसे खर्चीले इलाज आयुष्मान के माध्यम से निःशुल्क कराए जा रहे हैं।

आंकड़ों के अनुसार, डायलिसिस के 2.67 लाख से अधिक मामलों में 177 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए हैं। हृदय रोगों के इलाज में 39 हजार से अधिक मरीजों को लाभ मिला, जिस पर 345 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय हुई। कैंसर के 79 हजार से ज्यादा मरीजों का कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और सर्जरी के माध्यम से इलाज किया गया, जिस पर 221 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए।इसके अलावा न्यूरोसर्जरी के 11 हजार से अधिक मामलों में करीब 59 करोड़ रुपये, नेत्र रोगों की सर्जरी में 119 करोड़ रुपये, प्रसूति एवं स्त्री रोग उपचार में 60 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है। हिप और नी रिप्लेसमेंट जैसे महंगे ऑपरेशन भी आयुष्मान योजना के तहत निःशुल्क किए गए, जिससे सैकड़ों परिवारों को बड़ी राहत मिली।यह योजना न केवल मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध करा रही है, बल्कि बीमारी के कारण परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को भी कम कर रही है। आयुष्मान योजना आज लाखों जरूरतमंदों के लिए जीवनदान साबित हो रही है।

“आयुष्मान योजना ने गरीबों को बीमारी के साथ-साथ आर्थिक चिंता से भी मुक्त किया है। यह योजना न केवल इलाज देती है, बल्कि परिवारों का मनोबल भी बचाती है।”
— डॉ. धन सिंह रावत, स्वास्थ्य मंत्री

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *