महिलाओं में आर्थराइटिस का खतरा ज्यादा क्यों? जानिए कारण और बचाव – Jan Jan Tak
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महिलाओं में आर्थराइटिस का खतरा ज्यादा क्यों? जानिए कारण और बचाव

Byjan_jantak

Aug 11, 2025

पहले आर्थराइटिस (Arthritis) को केवल उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या माना जाता था, लेकिन अब यह कम उम्र के लोगों में भी तेजी से बढ़ रही है। सुबह उठते ही जोड़ों में जकड़न, सीढ़ियां चढ़ते समय घुटनों में दर्द, या उंगलियों में सूजन—अगर आप इन लक्षणों को नज़रअंदाज कर रहे हैं, तो यह आर्थराइटिस के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। समय रहते ध्यान न देने पर यह गंभीर समस्या का रूप ले सकती है।

शोध बताते हैं कि महिलाओं में आर्थराइटिस का खतरा पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक है। यह केवल उम्र या कैल्शियम की कमी का नतीजा नहीं है, बल्कि हार्मोनल बदलाव, इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी और अनहेल्दी लाइफस्टाइल भी इसका बड़ा कारण बन सकते हैं।

महिलाओं में खतरा क्यों ज्यादा?

हार्मोनल बदलाव: अमेरिकन कॉलेज ऑफ रूमेटोलॉजी के अनुसार, एस्ट्रोजन हार्मोन हड्डियों और जोड़ों की सुरक्षा करता है। मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर गिरने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे आर्थराइटिस का खतरा बढ़ जाता है।

ऑटोइम्यून डिजीज का असर: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, रुमेटाइड आर्थराइटिस महिलाओं में पुरुषों से 2-3 गुना ज्यादा पाया जाता है।

गर्भावस्था और वजन: गर्भावस्था के दौरान बढ़ा वजन और पेल्विक हड्डियों पर दबाव आगे चलकर घुटनों और कूल्हों को प्रभावित कर सकता है।

जोखिम क्यों बढ़ रहा है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 40 की उम्र के बाद 60% महिलाओं में घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण दिखने लगते हैं। भारत में 70% महिलाएं विटामिन डी की कमी से जूझ रही हैं, जो जोड़ों की सेहत को और बिगाड़ देती है।

किन्हें ज्यादा सतर्क रहना चाहिए?

मेनोपॉज के बाद की महिलाएं

गर्भवती या हाल ही में मां बनी महिलाएं

जिनके परिवार में आर्थराइटिस का इतिहास है

मोटापा या अधिक वजन वाली महिलाएं

आर्थराइटिस से बचाव के आसान उपाय

पौष्टिक आहार लें: दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियां, ओमेगा-3 फैटी एसिड (मछली, अखरोट, अलसी के बीज) और एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड्स (हल्दी, अदरक, लहसुन) का सेवन करें।

नियमित व्यायाम करें: योग, वॉकिंग, साइकिलिंग और तैराकी जोड़ों की लचीलापन बनाए रखते हैं।

वजन नियंत्रित रखें: अधिक वजन घुटनों पर दबाव डालता है, इसे कम करना जरूरी है।

हड्डियों की जांच कराएं: मेनोपॉज के बाद नियमित रूप से डॉक्टर से हड्डियों और जोड़ों की सेहत की जांच कराएं।

थोड़ी सी सतर्कता और सही जीवनशैली अपनाकर महिलाएं न केवल आर्थराइटिस के खतरे को कम कर सकती हैं, बल्कि लंबे समय तक जोड़ों को मजबूत और स्वस्थ भी रख सकती हैं।

(साभार)

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